Muslim-Sikh Dispute Over Haryana Gurudwara: हरियाणा के यमुनानगर जिले में स्थित जठलाना गुरुद्वारा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है. पिछले 58 साल से मुस्लिम और सिख समुदाय के बीच कानूनी लड़ाई चल रही थी. लेकिन संसद में वक्फ बोर्ड के पारित होते ही सिख समुदाय में काफी खुश है. हालांकि मुस्लिम समुदाय अभी भी इस जमीन पर 200 साल पुरानी मस्जिद होने का दावा कर रहा है.
जानें क्या था पूरा विवाद
साल 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद यह जमीन मस्तान चंद को अलॉट की गई थी. जिसे बाद में उन्होंने गुरुद्वारे को सौंप दी थी. लेकिन साल 1967 में वक्फ बोर्ड ने इस जमीन पर दावा ठोकते हुए इसे मस्जिद बताया गया. बाद में यह मामला लोअर कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. बाद में यह समझोता हुआ कि यह जगह हिंदू-समाज की है उन्हें सौपं दी जाएं. लेकिन इस समझौते पर बात नहीं बनी. बता दें साल 1963 में वक्फ बोर्ड की स्थापना हुई थी.
बता दें, इस समय सिख समाज की चौथी पीढ़ी कानूनी लड़ाई को लड़ रही है. गुरुद्वारा प्रंबधक कमेटी के प्रधान मनिंदर सिंह मक्कड़ का कहना है कि उनके पूर्वजों ने इस गुरुद्वारे को बचाने के लिए जीवन भर संघर्ष किया था, तो वह किसी भी हाल में उसे छोड़ने को तैयार नहीं है. सिख-मुस्लिम के इस जमीन विवाद के मामले से शुरूआत से जुड़े राम प्रकाश का कहना है कि उन्होंने हमेशा से अपने जीवन में गुरुद्वारे के रुप में देखा है.
वहीं, मुस्लिमों का दावा है कि इस जमीन पर उनकी 200 साल पुरानी मस्जिद है. जिस पर बंटवारे (भारत-पाक) से पहले अजान और नमाज पढ़ी जाती थी. सुम्लिम पक्ष के वकील मोहम्मद और इसरार अली का कहना है कि इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक मस्जिद को किसी और जगह पर शिफ्ट नहीं किया जा सकता है इसलिए वे यह कानूनी लड़ाई को जारी रखेंगे.
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