हरियाणा के गुरुग्राम जिले में होने वाली सबसे बड़ी सीलिंग कार्रवाई पर पुलिस ने रोक लगा दी है. गुरुग्राम के DLF क्षेत्र में 2500 मकानों की सीलिंग करने की तैयारी करके बैठे टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (TCPD) विभाग को सुप्रीम झटका लगा है. शुक्रवार को चलाए जाने वाले इस सीलिंग अभियान पर आज ही सुप्रीम कोर्ट ने पांच सप्ताह के लिए रोक लगा दी. कोर्ट के इस फैसले से मकान मालिकों को बड़ी राहत मिली है.
जानें क्या है मामला
दरअसल, डीएलएफ फेज-1 से 5 में रिहायशी प्लॉट्स पर व्यवसायिक गतिविधियां चलाने पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सीलिंग के आदेश दिए थे. हाई कोर्ट के आदेश के बाद डीपीपी विभाग ने डीएलएफ फेज-1 से 5 तक सर्वे करवाया गया था. करीब 15 हजार बिल्डिंग का सर्वे किया. इनमें से चार हजार से ज्यादा ऐसी इमारतें हैं, जो कि रिहाइशी प्लॉट हैं, लेकिन वहां पर व्यवसायिक गतिविधियों चलाई जा रही हैं. टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की एनफोर्समेंट टीम की ओर से डीएलएफ फेज-1 से 5 तक अवैध निर्माणों और मकानों में चलाई जा रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर विभाग सक्रिय हुआ. प्रशासन की ओर से इन मकानों को सील करने की पूरी रूपरेखा और तैयारी कर ली गई थी.
मकानों को दिए थे कारण बताओ नोटिस
गुरुग्राम के उपायुक्त की ओर से 4 अप्रैल से मकानों को सील करने व कब्जों को तोड़ने की योजना को मंजूरी दी थी. एनफोर्समेंट टीम की ओर से 4 हजार से अधिक मकानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए. साथ ही करीब 2500 मकानों को सील करने की तैयारी की गई. डीटीपीई अमित मधोलिया ने इस विषय पर लोगों से अपील की गई कि 4 अप्रैल से पहले अपने मकानों को रिस्टोर कर लें. अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो मौके पर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. जिसके लिए विभाग किसी प्रकार से जिम्मेदार नहीं होगा. डीटीपीई विभाग ने इस कार्रवाई को हाई कोर्ट के आदेश की पालना बताया. कहा गया कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई की जा रही है. जिला प्रशासन की ओर से 19 अप्रैल तक पूरी रिपोर्ट सीलिंग करने के बाद कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करनी है.
टैक्स, मैंटेनेंस दे रहे हैं तो सीलिंग क्यों
डीएलएफ फेज-1 से 5 तक जिन मकानों और प्रॉपर्टी पर विभाग ने कार्रवाई करने की तैयारी की थी, वहां के लोग खुलकर विरोध जताते रहे हैं. लोगों का कहना है कि वह कई वर्षों से नगर निगम को व्यावसायिक टैक्स दे रहे हैं. डीएलएफ को मेंटेनेंस दे रहे हैं. इसके बावजूद उनके खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने पांच सप्ताह तक सीलिंग पर रोक लगाई है. लोगों ने कहा कि पांच सप्ताह का उन्हें सुप्रीम कोर्ट से समय मिला है. इस बीच सभी तरह से हम स्थायी राहत निकालने के लिए प्रयास करेंगे. साथ ही प्रशासन से लोगों ने मांग की है कि प्रशासन सीलिंग की बजाय बीच का कोई रास्ता निकाले. सरकार से भी इस विषय में बात की जाएगी.
साभार – हिंदुस्थान समाचार
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