Jind: जींद पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर शनिवार (29 मार्च) को चैत्र अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान किया तथा पिंडदान करके करके तर्पण किया. ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ पर शुक्रवार को शाम से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था. पूरी रात धर्मशालाओं में सत्संग तथा कीर्तन आदि का आयोजन चलता रहा.
शनिवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान तथा पिंडदान शुरू किया. इस मौके पर दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया तथा सूर्य देव को जलार्पण करके सुख समृद्धि की कामना की. तीर्थ पर पुलिसकर्मी पूरा दिन तैनात रहेंगे.
महिला घाटों पर महिला पुलिसकर्मियों की डयूटी लगाई गई है. घाटों पर आटे के पिंडों के कारण फिसलन पैदा न हो, इसको ध्यान में रखते हुए घाटों पर पिंड डालने के लिए विशेष व्यवस्था रही. वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाए रखने के लिए वाहनों की पार्किंग व्यवस्था की तरफ पुलिस प्रशासन ने विशेष ख्याल रखा. पिंडारा तीर्थ पर अमावस्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने जमकर खरीददारी भी की. तीर्थ पर जगह-जगह लोगों ने सामान बेचने के लिए फड़े लगाई हुई थीं. जिस पर बच्चों तथा महिलाओं ने खरीददारी की. बच्चों ने जहां अपने लिए खिलौने खरीदे, तो वहीं बड़ों ने भी घर के लिए सामान खरीदा.
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की. बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया. तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है.
साभार – हिंदुस्थान समाचार
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