America Deported Illegal Indians: अमेरिका से डिपोर्ट कर इंडिया भेजे गए भारतीयों में शामिल जिले के भूना के गांव दिगोह निवासी गगनप्रीत सिंह को सकुशल घर वापस पाकर उसके परिजनों ने राहत की सांस ली है. अमेरिका से डिपोर्ट होकर गुरुवार तड़के करीब पौने चार बजे दिगोह गांव लौटने पर गगनप्रीत सिंह को उसके मां-बाप ने माथा चूमकर एवं गले लगाकर खूब रोते रहे. मां-बाप के साथ-साथ गगनप्रीत सिंह के आंखों से टपक रहे थे. फतेहाबाद पुलिस के अधिकारियों ने भी गगनप्रीत सिंह के घर जाकर
वेरिफिकेशन की. पुलिस जांच अधिकारी चमन सिंह को गगनप्रीत ने बताया कि अमेरिका से अमृतसर पहुंचने में उन्हें करीब 32 घंटे से अधिक का समय लगा. अमेरिका से इंडिया लौटते समय प्लेन में 104 लोग थे. 2 फरवरी की सुबह चले थे और छह घंटे के अवधि में आराम करने के लिए दो बार नीचे उतारा गया. इसके बाद लगातार 12 घंटे से अधिक प्लेन चलता रहा.
गगनप्रीत सिंह ने बताया कि उसके दोनों हाथ व पैरों में हथकड़ी लगा रखी थी. हथकड़ी लगे हाथों से ही खाना खा रहे थे. गगनप्रीत ने पुलिस को बताया कि प्लेन में सवार अमेरिका के अधिकारियों व्यवहार तो ठीक था, परंतु हालात कैदी जैसे थे. हथकड़ी से बंधे हुए लोगों को खड़े नहीं होने दे रहे थे. क्योंकि उपरोक्त अधिकारी प्रोटोकॉल का उल्लंघन मान रहे थे. प्लेन में सवार इंडियन लंबे समय से पैर बंधे होने के कारण उठने की कोशिश कर रहे थे. गगनप्रीत सिंह ने बताया कि प्लेन में किसी भी इंडियन को फोन साथ नहीं रखने दिया. उन्होंने बताया कि बैग और फोन तो डिटेंनशन सेंटर में ले जाने से पहले ही जब्त कर लिए गए थे और पहचान के लिए सभी बैगों पर नाम लिखे स्टिकर लगाए गए थे.
22 जनवरी को यूएस आर्मी ने बार्डर क्रॉस करते पकड़ा था गगनप्रीत सिंह ने बताया कि साढ़े 16 लाख रुपये देकर एजेंट के माध्यम से फ्रांस से स्पेन होते हुए 22 जनवरी को बॉर्डर क्रॉस करके अमेरिका पहुंच गया था. वहां उसी दिन अमेरिकन आर्मी ने पकड़ लिया. तब से उसे डिटेंनशन सेंटर में ही रखा हुआ था. इसके बाद सरकार के आदेश पर 2 फरवरी को वहां से वापस भारत में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई. दिगोह के गगनप्रीत सिंह ने पुलिस को बताया है कि वह 23 अगस्त 2022 को स्टडी वीजा लगवा कर इंग्लैड गया था. वहां अढ़ाई साल तक सोलेट यूनिवर्सिटी साउथ हैंपटन में पिज्जा हट में नौकरी की वहीं खर्च ज्यादा होने के कारण वह किचन में भी काम करता था. इंग्लैंड सरकार ने 20 घंटे काम करने की परमिशन दी हुई थी, इसलिए पढ़ाई के साथ-साथ खर्च निकालने के लिए गाड़ी भी चलाता था. इतना कुछ करने के बाद भी जब यूनिवर्सिटी की फीस नहीं भरी जा सकी तो उसने डंकी के रास्ते अमेरिका जाने का मन बनाया. एजेंट ने उससे साढ़े 16 लाख रुपये लेकर डंकी के रास्ते अमेरिका पहुंचा दिया, जहां उसे यूएस आर्मी ने हिरासत में ले लिया और तब से अपने पास ही रखा हुआ था. अब उन्हें अमेरिका से डिपोर्ट करके भारत भेज दिया गया. पंजाब के अमृतसर एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन से संबंधित वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करने के बाद हरियाणा के 32 लोगों को अंबाला भेजा गया. जहां से आगे अपने-अपने जिले में भेज दिया गया.
पिता ने कहा : आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए बेटे को भेजा था इंग्लैंडदिगोह निवासी गगनप्रीत के पिता सुखविंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब अढ़ाई साल पहले घर की आर्थिक हालात सुधारने के लिए बेटे गगनप्रीत सिंह को विदेश भेजा था. परिवार के पास तीन एकड़ जमीन थी, उसमें से ढाई एकड़ बेचकर पैसा जुटाया था. 50 लाख रुपये से ज्यादा खर्च आया था, मगर अब बेटा सकुशल घर लौट आया है. सुखविंद्र सिंह ने कहा कि अगर हरियाणा में ही नौकरियां मिल जाए तो बच्चों को बाहर नहीं भेजना की जरूरत नहीं पड़ती. अब सरकार से यही मांग है कि वह उनके बेटे को सरकारी नौकरी दे, ताकि उन्हें बेटे के भविष्य को लेकर कोई चिंता ना रहे.
साभार – हिंदुस्थान समाचार
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